‘चतुर कौआ’

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A 3rd standard student Jyoti Kumari (Bokaro , Jharkkhand ) is reciting a poem ‘चतुर कौआ’

बड़ी प्यास से मारा मारा,
भटक रहा है कौआ बेचारा,
गाँव गाँव में नगर नगर में
पानी ढूंड न पाया हरा ,
सहसा एक घड़ा जो देखा,
पर पानी था थोडा उसमें,
कंकड़ कंकड़ चुन कर,
कौआ लगा फेकनें बीच घड़े में
घड़े के गर्दन तक जब पानी पंहुचा,
तब निज प्यास बुझाई,
अक्ल और मेहनत के बल पर
किसने नहीं सफलता पाई,

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